Saturday, June 19, 2010

बिहार- अतीत , वर्तमान एवं भविष्य

बिहार - भारत के उत्तर -पूर्व सीमा पर अवस्थित एक राज्य । इस राज्य का एक गौरवशाली इतिहांस है । जगत जननी जानकी से लेकर भगवान गौतम बुध , महावीर , चाणक्य , चन्द्रगुप्त मौर्य , सम्राट अशोक , आर्यभट , महर्सी वाल्मीकि एवं दानवीर कर्ण की कर्मभूमि । शेरशाह शूरी ,1857 के वीर योद्धा वीर कुंवर सिंह ,अविभाजित बिहार के भगवान बिरसा मुंडा ,मिथिलांचल गौरव विद्यापति ,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही डॉ राजेंद्र प्रसाद ,जय प्रकाश नारायण ,मोइनुल हक , बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह , श्री अनुग्रह नारायण सिंह , श्री ललित नारायण मिश्र , बाबु जगजीवन राम ,शहीद जुब्बा सहनी सूचि बहुत लम्बी है । उपर जिन नामों की चर्चा मैंने की है , उनके बारे में विस्तार से लिखने बैठूं तो एक - एक व्यक्ति के उपर पूरा का पूरा ग्रन्थ लिखा जा सकता है और लिखा गया भी है । मैं उन सभी महान विभूतियों की आत्मा से क्षमा चाहता हूँ जिनका नाम मैं यहाँ नहीं लिख पाया हूँ ।वैसे यह सूचि सिखों के दसवें गुरु की चर्चा किये बिना अधूरी रह जाएगी ,अकाल तख्त के संस्थापक गुरु गोविन्द सिंह की जन्मस्थली भी बिहार ही है।
साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर , नागार्जुन , रामब्रिक्ष बेनीपुरी ,गोपाल सिंह नेपाली,फनीश्वरनाथ रेणु इत्यादी ने बिहार का नाम रौशन किया है । वहीँ शरत चन्द्र ,जय शंकर प्रसाद,जानकी वल्लभ शास्त्री इत्यादी कितने ही साहित्यकारों की रचनाओं की पृष्टभूमि बिहार रहा है ।
बिहार के अतीत की चर्चा वैशाली के बिना अधूरी है । विश्व को गणतंत्र की अवधारणा देने वाले वैशाली को हम कैसे भूल सकते हैं । आपको पता है , वैशाली में उस समय लोकतान्त्रिक व्यवस्था थी जब विश्व ने उसके बारे में कल्पना भी नहीं की होगी ।
शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय के योगदान को भुलाना अपराध के समान है । उस समय पुरे विश्व के विद्यार्थी ज्ञानार्जन हेतु नालंदा आते थे । नालंदा का खंडहर इस बात का गवाह है की बिहार में उस समय भवन निर्माण कला कितनी सुव्यवस्थित थी ।

2 comments:

  1. by this blog , you gave us chance to understand bihar in a different way.
    Thank you

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  2. मेरा नाम अविनाश ,शिवहर निवासी

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